नंदाचौर सवर्ग अज बनया

नंदाचौर सवर्ग अज बनया

नंदाचौर सवर्ग अज बनया इलाही ज्योत आई है
खुशि घर घर में छाई है
ओम ओम हर रोम में रमया , इलाही ज्योत आई है
खुशि घर घर में छाई है

 

लिया अवतार था दिन आज के यहाँ ओम बापू ने,
मेरे प्यारे बापू ने
तपसया और सेवा कर रिझाया ओम बापू ने ,
मेरे प्यारे बापू ने
गुलो गुलज़ार अज खिलया, इलाही ज्योत आई है
खुशि घर घर में छाई है

 

खिल उठा गुलाब माता गुलाब देवी के चमन का था
कुल आलम वो चमन का था
था आशिक वो हकीकत का , पुजारी वो अमन का था
प्रभु नंदाचौर खुद चलया
इलाही ज्योत आई है खुशि घर घर में छाई है

 

निडर और बेधड़क बापू हमेशा मस्त रहते
चढ़ी रहती खुमारी नाम कि और मस्त रहते थे
न सच्ची कहन तो टलया
इलाही ज्योत आई है खुशि घर घर में छाई है

 

किया इन्कार इक दसतार से सयद मल ने था
भगत सयद मल ने था
इधर इनकार उधर लगी आग बचाया फिर भी पल में था
पैसा पैसा सब सी मिलया
इलाही ज्योत आई है खुशि घर घर में छाई है

 

सच्चे दिल से पुकारा जिसने है आया झट पट ही
किया विशवास श्रद्धा से
लोले पुत दर तेरा मलया
इलाही ज्योत आई है
खुशि घर घर में छाई है

 

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